मृत आधार कार्ड भारत में,करोड़ों की मौत के बाद भी सक्रिय है

        


            करोड़ों की मौत के बाद भी सक्रिय है आधार कार्ड! RTI में हुआ चौंकाने वाला खुलासा


आज के डिजिटल युग में आधार कार्ड देश का सबसे महत्वपूर्ण दस्तावेज़ बन चुका है। बैंक खाता खोलना हो, सब्सिडी लेनी हो, मोबाइल सिम चाहिए या सरकारी योजना — सब कुछ आधार से जुड़ा है।
लेकिन एक हालिया RTI (सूचना का अधिकार) आवेदन ने आधार कार्ड सिस्टम की गंभीर खामी को उजागर किया है।

हजारों नहीं, करोड़ों लोगों की मौत के बाद भी उनके आधार नंबर अभी तक सक्रिय हैं!


🔸 क्या कहती है RTI?

RTI (Right to Information) के तहत मिली जानकारी में सामने आया है कि:

  • अब तक देश में केवल 1.15 करोड़ आधार कार्ड ही निष्क्रिय किए गए हैं।

  • जबकि सरकारी आँकड़ों के अनुसार हर साल औसतन 80-90 लाख लोगों की मृत्यु होती है।

  • अगर इन आंकड़ों को जोड़ें, तो 2010 से अब तक लगभग 11–12 करोड़ लोगों की मृत्यु हो चुकी होगी।

➡️ इसका मतलब है कि 10 करोड़ से अधिक मृत लोगों के आधार कार्ड आज भी सिस्टम में सक्रिय हैं!


🔸 इसका क्या खतरा है?

यदि मृतकों के आधार नंबर सक्रिय हैं, तो इसका दुरुपयोग कई तरीकों से हो सकता है:

  1. फर्जी सब्सिडी लेना:
    गैस सब्सिडी, वृद्धावस्था पेंशन, सरकारी योजनाओं का पैसा — ये सब मृत व्यक्ति के नाम पर निकाला जा सकता है।

  2. बैंकिंग फ्रॉड:
    मृत व्यक्ति के नाम से बैंक खाता चालू रखा जा सकता है, या आधार लिंक करके फर्जी लेन-देन हो सकता है।

  3. मतदाता पहचान पत्र और पेंशन फर्जीवाड़ा:
    एक ही व्यक्ति कई बार ‘जिंदा’ दिखाकर सरकारी पेंशन/वोटिंग में हिस्सा ले सकता है।


🔸 UIDAI का जवाब क्या है?

UIDAI (Unique Identification Authority of India) ने RTI में बताया कि:

  • आधार को रद्द करने की प्रक्रिया काफी जटिल और लंबी होती है।

  • जब तक परिवार या राज्य सरकार की ओर से मृत्यु प्रमाण पत्र और निवेदन नहीं आता, तब तक कार्ड निष्क्रिय नहीं किया जाता।

इसका मतलब — मौत के बाद भी अगर कोई जानकारी नहीं भेजता, तो आधार चलता रहेगा!


🔸 सरकार की ओर से उठाए गए कदम

हालांकि, अब कुछ राज्य सरकारें और नगर निकाय, जनसंख्या रजिस्टर और मृत्यु पंजीकरण को आधार से लिंक करने पर काम कर रहे हैं।
लेकिन राष्ट्रीय स्तर पर कोई ठोस और तेज़ प्रक्रिया नहीं है, जिससे मृत्यु के बाद तुरंत आधार निष्क्रिय हो जाए।


🔸 समस्या का समाधान क्या हो सकता है?

  1. मृत्यु प्रमाणपत्र को UIDAI से ऑटोमैटिक लिंक किया जाए

  2. स्वास्थ्य मंत्रालय और UIDAI के बीच API आधारित डेटा एक्सचेंज

  3. परिवारजनों को मृत्यु के 15 दिनों के भीतर आधार निष्क्रिय करने की सुविधा

  4. ऑनलाइन निष्क्रियकरण पोर्टल जिसमें मृत्यु प्रमाणपत्र अपलोड कर आधार बंद कराया जा सके


🔸 एक चिंताजनक सच्चाई

देश में Aadhaar की पहुंच 100 करोड़ से अधिक लोगों तक है। इसका मतलब है कि यह प्रणाली जितनी शक्तिशाली है, उतनी ही सुरक्षा और पारदर्शिता की भी मांग करती है।

यदि मृत व्यक्ति का डेटा अब भी ‘जिंदा’ चल रहा है, तो यह सिर्फ सरकारी व्यवस्था की कमी नहीं, बल्कि हम सभी के लिए खतरे की घंटी है


🔸 निष्कर्ष

RTI से हुआ यह खुलासा हमारे सामने एक बड़ी प्रशासनिक खामी उजागर करता है।
"डिजिटल इंडिया" की बात तभी सार्थक होगी जब डेटा न केवल जुड़े हों, बल्कि सही और अद्यतन भी हों

"सही व्यक्ति को लाभ मिले और फर्जीवाड़े पर लगाम लगे — इसके लिए जरूरी है कि सरकार मृत्यु के बाद आधार निष्क्रिय करने की प्रक्रिया को सरल और प्रभावी बनाए।"

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