जयपुर में 100 साल बाद फिर लौटी 'ज्योणार' की परंपरा। 50 हजार से ज्यादा लोगों ने एक साथ दाल-बाटी-चूरमे का स्वाद चखा। जानिए क्या है ज्योणार का इतिहास, महत्व और आयोजन की भव्यता।
जयपुर ज्योणार परंपरा
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दाल बाटी चूरमा भोज
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Jyonar Jaipur 2025
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50 हजार लोगों का भोज
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राजस्थान शाही परंपरा
क्या है 'ज्योणार'? एक नजर इस शाही परंपरा पर
‘ज्योणार’ एक प्राचीन राजस्थानी परंपरा है, जो राजा-महाराजाओं के समय में आम जनमानस और अतिथियों के लिए शाही भोज के रूप में मनाई जाती थी। इसमें हजारों लोगों को पारंपरिक भोजन – दाल, बाटी और चूरमा – परोसा जाता था।
राजसी वैभव, भक्ति, भव्यता और लोक मिलन की मिसाल मानी जाने वाली यह परंपरा 100 वर्षों बाद फिर से जयपुर में जीवित हुई।
आयोजन का समय, स्थान और भव्यता
विवरण | जानकारी |
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📍 स्थान | जयपुर, राजस्थान |
🗓️ दिनांक | जुलाई 2025 का प्रथम सप्ताह |
👥 उपस्थिति | लगभग 50,000 से अधिक लोग |
🍽️ भोजन | दाल, बाटी, चूरमा, गट्टे की सब्ज़ी, लहसुन की चटनी, खीर आदि |
🎭 आयोजन स्थल | ओपन फील्ड + भव्य पंडाल, पारंपरिक साज-सज्जा |
क्यों था यह आयोजन खास?
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100 साल बाद इस परंपरा का आयोजन।
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राजपरिवार, स्थानीय संस्थाएं, और आम जनता – सभी एक ही पंक्ति में बैठे।
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भोजन परोसने वालों में संत, कलाकार, स्वयंसेवक, युवा और बुजुर्ग तक शामिल थे।
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मेहमानों को पत्तल और दोना में खाना परोसा गया – पारंपरिक तरीके से।
✅ राजघराने के प्रतिनिधि ने कहा: "यह आयोजन सिर्फ भोजन का नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक पहचान की वापसी है।"
लोक संस्कृति और संगीत ने रच दिया माहौल
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लोक कलाकारों ने किया रावणहट्टा और मुरली वादन।
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भजन, कीर्तन और लोकनृत्य ने माहौल को भक्ति और उत्सव में रंगा।
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एक तरफ भोजन चल रहा था, दूसरी तरफ राजस्थानी संस्कृति की अद्भुत झलक।
📸 सोशल मीडिया पर भी छाया ‘ज्योणार’
इस आयोजन के वीडियो और फोटो इंस्टाग्राम, फेसबुक और ट्विटर पर जमकर वायरल हो रहे हैं।
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