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जर्मनी में 2025 की पहली छमाही में शरण/आश्रय (Asylum) के लिए किए गए आवेदनों में लगभग 50% की गिरावट दर्ज की गई है। यह देश की सख्त प्रवासन नीति और यूरोपीय संघ के सामूहिक प्रयासों का संकेत देता है। आंकड़ों के अनुसार, इस वर्ष 65,500 नए आवेदन दर्ज किए गए, जबकि 2024 की इसी अवधि में यह संख्या 115,000 से अधिक थी।
📉 गिरावट के प्रमुख कारण:
1. 🔐 सख्त बॉर्डर कंट्रोल और डबलिन एग्रीमेंट का प्रभाव
जर्मनी ने अपने सभी पड़ोसी देशों—खासकर ऑस्ट्रिया और पोलैंड—के साथ सीमा सुरक्षा को सख्त किया है। कई मामलों में शरणार्थियों को उसी देश में वापस भेजा जा रहा है जहाँ से उन्होंने प्रवेश किया था, जोकि EU के डबलिन रेगुलेशन के अंतर्गत आता है।
2. 🛂 EU–तुरकी और EU–तुनिशिया डील का असर
EU ने तुर्की और उत्तरी अफ्रीकी देशों के साथ शरणार्थियों को अपने ही क्षेत्र में रोकने के लिए समझौते किए हैं। इससे अवैध रूप से यूरोप पहुँचने वाले प्रवासियों की संख्या में कमी आई है।
3. 🧾 प्रवेश नियमों में बदलाव
2025 की शुरुआत से जर्मन सरकार ने शरण संबंधी प्रक्रियाओं को तेज और सख्त बना दिया है। झूठे या आधारहीन दावों पर तुरंत कार्रवाई की जा रही है।
📊 संख्या में बदलाव (2024 बनाम 2025):
वर्ष | कुल आवेदन | गिरावट का प्रतिशत |
---|---|---|
जनवरी–जून 2024 | 1,15,000 | — |
जनवरी–जून 2025 | 65,500 | 🔻 43% – 50% के करीब |
🗣️ राजनीतिक प्रतिक्रिया
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चांसलर फ्रीडरिक मर्क ने कहा:
"जर्मनी शरणार्थियों को इंसानियत के आधार पर मदद देता रहेगा, लेकिन हम अवैध प्रवास को हरगिज़ बर्दाश्त नहीं करेंगे।" -
ग्रीन पार्टी और लेफ्ट विंग विपक्ष ने इस गिरावट को मानवाधिकारों पर असर बताते हुए आलोचना की है।
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क्रिश्चियन डेमोक्रेटिक यूनियन (CDU) जैसे दलों ने सख्त नीति का समर्थन किया है।
🌍 क्या बदलेगा यूरोपीय प्रवासन का चेहरा?
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जर्मनी यूरोप का सबसे बड़ा शरणार्थी स्वीकार करने वाला देश रहा है, परंतु अब वह “सुरक्षा और नियंत्रण” के नए मॉडल की ओर बढ़ रहा है।
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यह संकेत देता है कि आने वाले समय में बाकी यूरोपीय देश भी जर्मनी की तरह प्रवासन नीति में बदलाव कर सकते हैं।
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