पटना/बिहटा | 26 जून 2025
बिहार की सियासत में फिर से हलचल तेज हो गई है। चुनावी मौसम आते ही नेताओं के वादों और उन पर सवालों की बारिश शुरू हो गई है। इस बार निशाने पर हैं तेजस्वी यादव, और सवाल कर रहे हैं जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर (PK)।
Bihta (बिहटा) में एक जनसभा को संबोधित करते हुए प्रशांत किशोर ने तेजस्वी यादव और उनकी नेतृत्व क्षमता पर तीखा हमला बोला।
🔍 “पेन बांटकर सत्ता देना भूल थी” — PK का हमला
प्रशांत किशोर ने अपने भाषण में कहा:
“तेजस्वी यादव को 20 महीने में बिहार बदलने का मौका मिला, लेकिन उन्होंने सिर्फ 'पेन बांटे' और वादे किए। अब वही युवा बेरोजगार घूम रहे हैं। क्या यह मज़ाक नहीं है कि एक नौवीं पास नेता बिहार के भविष्य की बात कर रहा है?”
PK का यह बयान साफ तौर पर शिक्षा और रोजगार जैसे मुद्दों पर तेजस्वी की विफलता को उजागर करने की कोशिश है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि चुनावों से पहले किए गए 10 लाख नौकरियों के वादे भी अब तक धरातल पर नहीं दिखे हैं।
🏛️ RJD के 15 साल का क्या हुआ?
प्रशांत किशोर ने केवल वर्तमान नहीं, बल्कि RJD के पिछले शासनकाल को भी कटघरे में खड़ा किया। उन्होंने सीधा सवाल पूछा:
“तेजस्वी खुद कहते हैं कि उन्हें काम करने का मौका सिर्फ 20 महीने मिला, लेकिन क्या वह भूल गए कि उनके पिता की सरकार ने बिहार में 15 साल तक शासन किया था? तब क्या हुआ विकास का?”
यह बयान बिहार की जनता को यह याद दिलाने की कोशिश है कि राजद परिवार पहले भी सत्ता में रहा है, और अगर विकास नहीं हुआ, तो जवाबदेही सिर्फ मौजूदा सरकार की नहीं बल्कि विपक्ष की भी बनती है।
📚 शिक्षा बनाम राजनीतिक विरासत?
प्रशांत किशोर ने तेजस्वी यादव की शैक्षणिक योग्यता को भी निशाने पर लिया। उन्होंने कहा कि "एक नौवीं पास नेता से यह उम्मीद करना कि वो नीतिगत बदलाव लाएगा, बेईमानी है।"
हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनका यह वक्तव्य निजी नहीं बल्कि वैचारिक स्तर पर है। बिहार जैसे राज्य के लिए नेतृत्व को विजन और नीति की समझ रखने वाला होना चाहिए।
🎯 क्या यह रणनीति है?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि प्रशांत किशोर तेजस्वी यादव को महागठबंधन का कमजोर चेहरा दिखाने की रणनीति पर काम कर रहे हैं। Jan Suraaj पार्टी अभी तक 243 सीटों पर अकेले चुनाव लड़ने की तैयारी में है, और इस तरह के बयान PK को “निराश लेकिन विकल्प खोजती जनता” का नेता बनाते हैं।
📢 जनता की प्रतिक्रिया
सोशल मीडिया पर PK के इस बयान को लेकर तीखी बहस शुरू हो गई है। कुछ लोगों ने उन्हें “सत्य बोलने वाला” बताया, जबकि RJD समर्थकों ने इसे “राजनीतिक पब्लिसिटी” करार दिया।
🧾 निष्कर्ष
बिहार चुनाव 2025 की तैयारियाँ जोरों पर हैं। सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों ही वादों और विफलताओं के जरिए जनता को अपने पाले में खींचने की कोशिश में लगे हैं। प्रशांत किशोर का यह हमला केवल तेजस्वी यादव पर नहीं, बल्कि उन सभी नेताओं पर है जो सिर्फ वादे करते हैं और ज़मीनी बदलाव नहीं लाते।
आने वाले महीनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि जनता इस बहस में किसे ‘विकल्प’ और किसे ‘विफलता’ मानती है।
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