😢 17 लाख मासिक किराया, ₹2 लाख का टेनिस रैकेट: राधिका यादव की हत्या का पूरा सच

 



एक चमकते स्टार की दर्दनाक कहानी

25 वर्षीय राधिका यादव, गुरुग्राम की एक होनहार टेनिस खिलाड़ी और कोच थीं। उन्होंने जूनियर अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा की और अपनी पढ़ाई के साथ-साथ Sector‑57 में एक टेनिस अकादमी भी चलायी

🏠 विलासिता और आत्मनिर्भरता

राधिका के पिता दीपक यादव एक संपन्न व्यक्ति थे, जिनकी मासिक आय ₹15 लाख से ₹17 लाख तक थी और एक लग्ज़री फार्महाउस और कई किराए की संपत्तियाँ थीं । उन्होंने अपनी बेटी के लिए अत्याधुनिक कोचिंग और सुविधाओं पर ₹2.5 करोड़ तक खर्च किए  जिसमें ₹2 लाख का टेनिस रैकेट भी शामिल है

 तनाव की शुरुआत: अकादमी, सोशल मीडिया और शर्मिंदगी

घटना के कुछ समय पहले राधिका और उसके पिता के बीच तनाव गहरा गया। दबाव इस बात का था कि “लोग कहने लगे हैं कि बेटी के पैसे पर चल रहा है परिवार” । पिता ने अकादमी बंद करने को कहा, लेकिन राधिका अपने करियर और अकादमी के पक्ष में ठहरी


🔫 उस दिन क्या हुआ?

9 जुलाई की सुबह करीब 10:30 बजे, राधिका रसोई में थीं। उसी दौरान उनके पिता ने अपने लाइसेंसी .32 बोर रिवॉल्वर से पाँच गोलियाँ चलाई, जिनमें से तीन पीछे लगीं — उन्होंने उन्हें वहीं ढेर कर दिया। अंत्योपरांत 4 गोलियां छाती में पाई गईं — ऑटोप्सी रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ

घटना के समय राधिका की माँ नीचे दूसरी मंज़िल पर थीं — पुलिस अब उन पर भी संदेह कर रही है कि क्या उन्होंने घटना को रोकने की चेष्टा की या किसी प्रकार की जानकारी रखी थी

राधिका के चाचा और कजिन ने मौका देखे तुरंत उसे अस्पताल पहुंचाया, लेकिन डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।


🕵️‍♂️ पिता का मानसिक दायरा: आत्महत्या की धमकी और ‘कर्ज’-भावना

पुलिस रिपोर्ट में सामने आया कि तीन दिन पहले ही पिता ने आत्महत्या या बेटी की हत्या करने की धमकी दे रखी थी । उन्होंने स्वीकार किया कि उनका अपने आर्थिक निर्भरता और बेटी के सफल जीवन को लेकर मन में झिझक थी


🌍 समाज-मीडिया में तेज़ प्रतिक्रिया

  • सोशल मीडिया पर चर्चा हुई कि क्या Instagram Reels पर राधिका की सक्रियता पिता के पते तक पहुँची और यही कारण बना

  • सामने आया कि उनके पिता ने कई विद्यार्थियों और दोस्तों को बताया था — “मैं उस पर निर्भर रह गया हूँ”


💡 क्यों यह केस महत्व रखता है?

  1. पितृसत्ता के भयावह परिणाम – पुत्री के सफलता को ग्रहण मान लेना

  2. आर्थिक आत्मनिर्भरता में लगे परिवार की विडम्बना

  3. मानसिक तनाव और सामाजिक दबाव से उत्पन्न हिंसा

  4. घरेलू जांच और आस-पास की प्रतिक्रियाएं — माँ की भूमिका, चाचा आदि

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